मैं खिड़कियां तोड़कर ही छलांग लगाउंगी




संसार के समस्त मुख्य पृष्ठों पर 
तुम उंडेलते रहे अपनी जीवन गाथाएं
और मेरे लिए छोड़े गए सिर्फ हाशिए
जहां, हर बार मैने लघुत्तम रूप में उतारी अपनी आत्मकथा

एक आत्मकथा
जिसमें उदासियां इतने भीतर तक पसरी थीं कि वे सुन्दर हो गई थीं 
जहां पीड़ाएं हो गई थीं इतना सच कि उनसे छूटने की कोई शीघ्रता न बची थी
और अन्तत: जिसे घोषित किया गया
एक ‘नीरस औरत की नीरस कहानी’

जब तुम ने तय किए सफलता के समूचे कठोर रास्ते
तुम्हारे पद चिह्नों के ठीक पीछे थे मेरे पैरों के निशां
देखो, वे इतिहास के किसी भी भाग में कभी दर्ज नहीं हुए

मुझे रोज पिलाई गई है एक कारगर पिछलग्गू बनने की घुट्टी
बचपन के दिनों से मैने रचे हैं मिट्टी के घर और सजाई हैं गुड़ियाएं
एक पूरा जीवन रीत गया है, मुझे यह जानने भर में
कि तुम्हारे अस्तित्व के इर्द – गिर्द अपनी परछाई तलाशने के इतर
मेरे जीवन का भी कोई स्वतन्त्र उद्देश्य है

तुम कभी नहीं रहे मेरे प्रतिभागी, न हो सकोगे
चूंकि हमारी दौड़ ही बहुत अलग – अलग स्थानों से शुरू हुई है
जानती हूं, दरवाजे नहीं हैं मेरी नियति में 
मैं खिड़कियां तोड़कर ही छलांग लगाउंगी
जीवन के मैदान में।
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